अपने कलेजे के टुकड़े को बचाने के लिए पूरा परिवार तेंदुए से भिड़ गया, शोर शराबा सुनकर तेंदुआ जख्मी हालत में बच्चे को छोड़कर भाग गया, यदि जरा सी देरी होती तो तेंदुआ उसे घसीटकर शिकार मानकर जंगल में ले जा सकता था। चिकित्सकों के अनुसार बच्चे को गहरे घाव थे, इस वजह से उसे बचाया नहीं जा सका।
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